मेरी हँसी की वो एक वजह।

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कभी दर्द सी, कभी ज़र्द सी
ज़िंदगी बेनाम थी,
बन गया अफसाना इक बात से पहली दफा,
पा लिया है ठिकाना
तेरे दिये हुए दर्द की है पनाह

मेरी हँसी की वो एक वजह।

इक वो नज़र, इक वो निगाह
रूह में शामिल है तू इस तरह,
ना जाने क्यूँ खो गयी
मेरी हँसी की वो एक वजह।

तेरे न होने से कहीं खुस तो था मैं
कहीं अंदर ही अंदर बुझा तो था मैं,
पर नजर का दोष है, तुझे ढूंढ ही लेता है
दर्द में सुकून ढूंढने का मन बन ही जाता है।

मैं जब भी देख लूँ,
तुझे करीब से,
एहसास होता है,
मिल गया मुझे मेरा जहां
जिसके बिना मैं अधूरा हूँ,
मेरी मोहब्बत अधूरी है।

जहां पहली दफा तू आ मिला था
ठहरा हूँ वही मैं अभी,
तेरा दिल वो गलियारा था,
अफसोस वहाँ से लौट ना पाया मैं कभी।

यादें आज भी जला देती है मुझे
तुझसे दूर रहने की चाहत भी होती है कभी,
पर मैं वक़्त को दगा कहूँ या दिल का कसूर,
तुझे और तेरी वफ़ाई के तरफ दिल खुद खींचा चला आता है।

प्यार के बदले प्यार ना मिले,
तो उस दर्द को तुम क्या जानो,
अटूट तकलीफ के बदले भी अगर तेरे साथ हूँ
तो जनाब ये और कुछ नहीं बस मेरे इश्क़ का हुनर है।

जब प्यार में प्यार हो
आंशुओ में मुस्कान हो,
जब इंतज़ार सिर्फ वक़्त का हो
और याद बस उस कमबख्त का हो,
तो यकीन मानो इस खूबसूरत से दर्द में सुकून ढूंदना मैंने सीख लिया है।

तू जो रास्ता है वो मंज़िल किसी और की है
कभी उस मुसाफिर से मिलना तो कह देना,
अगर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है तो जो चाहे लगा लो डर कैसा
अगर जीत गए तो क्या कहना,
अगर हारे भी तो बाज़ी मात नहीं।

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