badge

Tag: poem

Lost between me and my thoughts

Lost between me and my thoughts

Poem
I was broken at the time when we were fighting I was building up my thoughts and in mind I was writing He was complaining to me for not reacting And there I was lost between me and my thoughts that were connecting Tired of these fights that are happening every moment I have no answer and no argue to give our fight an exponent Mistakes were there from both sides But where does those feelings hide I was not complaining about my needs not getting fulfill Every fight made me feel like I am dropping from the hill To him it was just the complains that matters Around me it was darkness and loneliness together Trust me its not about hating him but it is more about me I was losing all my self in order to make WE I am not ready to handle those fights It is also about my wish...
Rape victim-fighting the shoutings

Rape victim-fighting the shoutings

Poem
World thought I would die, But hard a lot I cry, Being the rape victim, fighting the shoutings that I hear, I know all my lifetime I have to bear. Cursing the faith of what happen, Faking people to be sadden, Outside they are roaming the culprits, Someday they are going to get a bad hit. Karma has its own cycle to be paid, None will let them enter by opening the gate, I cried a lot but now it is a time to take my own stand, Life has a taken a new bend. I know its too difficult to face the crowd But you need to remember not me to be blame throughout, Let me live at the very instinct, For the God sake, I am a rape victim.
जिंदगी से हार

जिंदगी से हार

Hindi poem
जब हम जिंदगी से हार जाते हैं, तब हम अपनी सारी उम्मीदें तोड़ जाते हैं, हर जगह अंधेरा दिखाई देता है, कुछ नहीं बचा हमें यह मान कर बैठ जाते हैं। वह सुबक-सुबक कर रोना मनज़ूर हो जाता है, जब हौसले का बांध टूट जाता है, जब सब चीज़े खलने लगती है, तभी सिर्फ निराशाएँ दिखने लगती हैं। आँखो के आंसू मंजिल के रास्तों को धुंधला कर देते हैं, हम भी नाकामयाबी को अपनी जिंदगी समझ लेते हैं, अंधेरे से प्यार होने लगता है, इसे हम अपना मुकद्दर कहते हैं। दिल में क्या-क्या छुपा रखा है, वह दर्द ही है जिसने सीने में आग को जला रखा है, सर को हमेशा उठाकर चलना, इस दामन को बचा कर चलना, रास्ते बहुत खराब है जिंदगी के, तू किसी की ना सुनना बस अपनी धुन में चलना।
Abortion

Abortion

Poem
Leaving the world is a better option Rather than getting a blame of abortion The child inside is eager to see the world But totally unaware about the outside dirt I can feel the happiness of the inside living Jumping, rolling and kicking It is all said by tears rolling down my eyes How difficult it is for me to decide For them it is just a matter of ego But how can I not notice the echo Echo of the heartbeats that I hear every time Sorry everyone, I am not ready to make that crime.
जीने की ज़रूरत

जीने की ज़रूरत

Hindi poem
तू ही जीने की ज़रूरत बन गया है, तेरे होने से ही मुझे सब मिल गया है, पूरी होती हूं जब तू मेरे पास होता है, तुझसे थोड़ा-सा भी दूर होकर दिल ये मेरा रोता है। सपने बुने तो थे किसी के आने के, वो अनकही बातों को सच बनाने के, दिल को कुछ इस तरह छू जाने के, किसी के आकर न जाने के। यू जकड़ लिया है तुम्हारे प्यार ने, के अब तुम्हारे सिवा कुछ दिखाई नहीं देता, अब न ही यह दिल तुम्हारे बिना है रहता। कौन कहता है कि रास्ते भूले नहीं जाते, मंजिल मिलने पर कौन हैं दर-ब-दर डगमगाते, मुझे तो बस इतना पता है, कि तुम्हारे सिवा मैं क्या सब कुछ लापता है।
हमने खुदको पूरा करना सीखा!

हमने खुदको पूरा करना सीखा!

Hindi poem
जिसको प्यार करके हमने खुदको पूरा करना सीखा, जिसकी निगाहों को देखकर हमने जीना सीखा, आज उसी की मुस्कुराहत हमें जिंदा कर देती है, जब वो पलभर के लिए मुझे निगाहें भरकर देख लेती है। उसके प्यार ने मेरे अकेलेपन को तोड़ा है, हर रास्ता उसने मेरा अपनी तरफ़ मोड़ा है, संजोए रखा है उसने मुझे और मेरे प्यार को, हिम्मत है वो मेरी जैसे भी रहे मेरे हालात हो। गरूर बन गयी है वो मेरा जबसे ज़िदगी में आयी है, मेरी खुशियों को अपने साथ जिंदा कर लायी है, उससे बढ़कर मेरी जिंदगी में अब और कुछ नहीं रहा, वो ही बन गयी है मेरे जीने की हर एक व़जहा।
जो तेरी हँसी को देखा इस बार

जो तेरी हँसी को देखा इस बार

Hindi poem
जो तेरी हँसी को देखा इस बार बेरहम-सी जिंदगी फिर से गुलजार हो गयी है, एक फरियाद मेरे दिल में दबी थी जैसे वो हँसी देख कर मैं फिर से जी गया। उम्मीद तो न थी तुझसे मिलने की आँखें चुराने का मन होता था, किस्मत का खेल है जनाब! जिस नफ़रत को अपना लिया था मैंने, आज उसी नफ़रत ने मुझे फिर से तेरा दीवाना कर दिया। तुमसे नज़रें क्या मिली रौशन फिज़ाएँ हो गयी आज बादलों का अलग रंग है, चुभती सूरज की किरण भी अलग नूर बिखेरे है मौसम बदलने लगा है जैसे, शायद तुझसे इश्क़ दुबारा कर बैठा हूँ। रेखाओं का खेल है मुकद्दर रेखाओं से मात खा रहा हूँ, पर होता है न की हारने का अपना मज़ा है तेरी नफ़रत के आगे हार तो गया था, पर उस हँसी को क्या बयां करूँ जिसके आगे मेरा इश्क़ फिर से जीत गया। जानता हूँ कुछ हो नहीं सकता है मेरे इश्क़ का पर तुमसे जब बच के गुज़रता हूँ, तो लगता है वो नज़र चुप के मुझे देख रही है और खु
Follow

Get the latest posts delivered to your mailbox: