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Wednesday, November 22, 2017
कभी दर्द सी, कभी ज़र्द सी ज़िंदगी बेनाम थी, बन गया अफसाना इक बात से पहली दफा, पा लिया है ठिकाना तेरे दिये हुए दर्द की है पनाह मेरी हँसी की वो एक वजह। इक वो नज़र, इक वो निगाह रूह में शामिल है तू इस...
तू ही जीने की ज़रूरत बन गया है, तेरे होने से ही मुझे सब मिल गया है, पूरी होती हूं जब तू मेरे पास होता है, तुझसे थोड़ा-सा भी दूर होकर दिल ये मेरा रोता है। सपने बुने तो थे किसी के आने...
वो कहते है मुकददर काम नहीं आता, झुककर हर किसी को सलाम किया नहीं जाता, रोना किस्मत की लकीरो में नहीं लिखा, चलता नहीं हर ज़गह किस्मत का सिक्का। कुछ मेहनत की दुआएँ भी छिन लाती है, जो सूकून दे जाती है, दर-दर की ठोकरें...
याद है वो पहली झलक जिस रोज़ तुझे देखा था, कुछ महसूस दिल को हुआ कुछ अंदर ही बस के रह गया। हुई न हिम्मत तुमसे कुछ कहने की दिन बीत गए एक लफ्ज़ कहने में, आया वो दिन जब खुसनसीबी मुझसे मिली घर कर गये...
जब हम जिंदगी से हार जाते हैं, तब हम अपनी सारी उम्मीदें तोड़ जाते हैं, हर जगह अंधेरा दिखाई देता है, कुछ नहीं बचा हमें यह मान कर बैठ जाते हैं। वह सुबक-सुबक कर रोना मनज़ूर हो जाता है, जब हौसले का बांध टूट...
काश खता की सजा मिलती पर यू ना बेवजह मिलती दर्द देकर खुशी देने का फायदा क्या बेवजह साथ रहने का फायदा क्या। हंसी भी दर्द देने लगी है यादें भी तनहा करने लगी हैं जख्मों से ख्याल भरे हैं बीते हुए लम्हें हमें ले कर...

हालात

कुछ सपने झिंझोरा करते हैं, हालात ऐसे हैं जो तोड़ा करते हैं, हकीकत है या सपना समझ नहीं आता, कौन सा ज्यादा प्यारा है, पता नहीं चल पाता।   जिसका साथ जीतना चाहते हैं, उसी से लड़ते हैं, इतना रोने के बाद भी ना जाने...
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