सुपर हीरो

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ज़रुरी नहीं है कि हर सुपर हीरो अपने साथ एक रक्षाकवच लेकर आए या वह दुनिया में एक अलग तरीके से पहचाना जाए। ज़रूरी तो यह भी नहीं है कि किसी हीरो के पास कुदरती ताकतें हो या फिर वह पूरी दुनिया को किसी संकट से बचाए या फिर कोई वह ऐसा चमत्कार करें जो दुनिया में और कोई नहीं कर सकता हो। हीरो की पहचान होती है उसके अपने कर्मों से। एक छोटे बच्चें के लिए उसका पिता भी एक हीरो हो सकता है। जो कि उसके सपने को सच कर सके और उसके बच्चों की नजरों में वह एक ऐसा व्यक्ति बन जाए जो कोई और नहीं बन सकता हो।

देखा जाए तो हमारे सेना के जवान भी हमारे लिए बहुत कुछ करते हैं। पर हम उन्हें उतनी मान्यता भी नहीं दे पाते जितना कि हम एक फिल्म के हीरो को देते हैं जैसे की सुपरमैन या बेटमैन को। ज़रूरी है हमारे यह समझना कि हम एक काल्पनिक हीरो को मान्यता ना देकर जीवन के उस असली हीरो को मान्यता दे जो हमारे लिए बहुत कुछ करता है और अपनी जान की बाजी लगा कर भी हमारी सुरक्षा करता है। सेना के जवानों के लिए उनकी मातृभूमि से ज्यादा और कुछ जरूरी नहीं है। वह अपनी मेहनत और अपनी लगन में कोई कमी नहीं छोड़ते सिर्फ इसलिए ताकि उनकी मातृभूमि का सर हमेशा गर्व से उठा रहे।

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Anamika Sharma
One of the founders of Ingenious Scribblers. I am currently pursuing B.tech in Electronics and Telecommunications. I never thought of blogging but I used to write since my childhood. Writing is my passion for which I can not compromise with anything else in my life. I have written hundreds of poems and few short stories. I never thought I would take my writing so seriously. It was just for letting my feelings out. Then, I started doing my internship in content writing and then I decided it is the field where I want to pursue my career.

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