वो पहली झलक!

0
30

याद है वो पहली झलक
जिस रोज़ तुझे देखा था,
कुछ महसूस दिल को हुआ
कुछ अंदर ही बस के रह गया।

हुई न हिम्मत तुमसे कुछ कहने की
दिन बीत गए एक लफ्ज़ कहने में,
आया वो दिन जब खुसनसीबी मुझसे मिली
घर कर गये तेरे कहे हुए वो शब्द मेरे सिने में।

उसी वख्त दिल ने कुछ हरकत की
इश्क़ में इतना हारा मैं,
ये तेरे नजरों ने क्या किया
शायद मुझे तुझसे प्यार हो गया।

गिर तो गया था मैं तेरे प्यार में
ध्यान कहाँ था आने वाले उस ज्वार का,
हाँ हो गयी वो गलती मुझसे
सच्चा सा प्यार जो कर बैठा।

पर तुझे तो उस राह की मंज़िल प्यारी थी
जिसका राही भी तू और कसौटी भी तू,
दिल करता था तुझसे कहूँ, तेरी आशिक़ी तेरे नाम कर दूँ
सौदा तेरी वफ़ाई का कर हीं लिया था, तेरी रेत की परछाईं को अपना मुकद्दर चुन हीं लिया था।

फिरता हूँ अब मारा-मारा मैं
जाने कौन है तू मेरी मैं ना जानु,
तब भी खुद को बर्बाद करता हूँ
फना हो के तुझसे मिलता हूँ।

तेरे लिए जी कर कुछ पल मैं जी जाता हूँ,
क्यूँ की मेरे लिए तू एक ही लफ्ज, एक हीं नाम है,
आशिक़ी और सिर्फ मेरी आशिक़ी
वो आशिक़ी जो तुझसे शुरू और मुझपे हीं आकर खत्म हो जाती है।

Comments

comments

SHARE
Previous articlePaan of Fire and Ice!
Next articleMet my boyfriend at my roka ceremony!
Nishant Aman
Myself Nishant Aman. I am a 2nd year undergraduate B.tech student from College Of Engineering Roorkee. Professionally, I am a programmer but writing take a different place in my heart. We know that, love teaches anything you guess. That happened, and today i just love to write. Whatever I write that is totally dedicated to special person of my life.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here